Wednesday, 13 March 2013

Urban Bank Scam : प्रेसीडेंट सहित 6 डायरेक्टर्स विश्वासघाती करार, सजा 19 को

हिमाचल प्रदेश/मंडी : मंडी अर्बन बैंक में हुए करोडों रुपये के बहुचर्चित घोटाले में अदालत ने बैंक के अध्यक्ष सहित बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के छह सदस्यों को विश्वासघात व आपराधिक षडयंत्र का दोषी करार दिया है।

हालांकि इस मामले में बैंक के कर्मियों व पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ अभियोग साबित न होने पर उन्हें बरी करने के आदेश दिए है। अदालत ने सजा की अवधि पर सुनवाई के लिए अब 19 मार्च की तारीख निश्चित की है।
जिला एवं सत्र न्यायधीश वीरेंद्र सिंह के न्यायलय ने बहुचर्चित अर्बन बैंक घोटाले का फैसला सुनाते हुए बैंक के तात्कालीन अध्यक्ष महिंद्र पाल सहगल, अजीत कपूर, मनजीत सिंह धमीजा, महेश बहल, नितिन कपूर और अनिल कपूर के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र के तहत विश्वासघात करने का दोषी करार दिया।
बुधवार को अदालत ने इन्हें दोषी करार देने का निर्णय सुनाया जबकि सजा की अवधि पर सुनवाई के लिए अब 19 मार्च की तारीख निश्चित की है।

सह आरोपियों को मिली राहत

एक तरफ जहां अदालत ने अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष सहित छह लोगों को दोषी करार दिया है, वहीं इस केस में सह आरोपियों को अदालत से राहत मिली है। अदालत ने 11 सह आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप सिद्ध न होने पर उन्हें बरी करने के आदेश सुनाए हैं। इस मामले के सह आरोपी बैंक के कर्मियों व पूर्व पदाधिकारियों चंद्र भूषण बहल, हेमंतराज वैद्य, अशोक कुमार कपूर, हरविलास बहल, हेमंत कपूर, देवरथ कपूर, गोपाल कपूर, भूप सिंह, प्रवीण कुमार मल्होत्रा और भगत राम के खिलाफ अभियोग साबित न होने पर उन्हें बरी किया गया।

सात साल बाद आया फैसला

इस मामले में अदालत का फैसला सात साल बाद आया। बैंक की वित्तीय अनियमितताओं के सामने आने पर सदर थाना पुलिस ने पहली अप्रैल 2005 को प्राथमिकी दर्ज करके तहकीकात शुरू की थी। पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोग के पूरा होने पर बुधवार को यह मामला फैसले पर रखा था।
ज्ञात हो कि अर्बन बैंक में करोडों रुपये का घोटाला होने के बाद यह बैंक बंद करना पड़ा था। इसके बाद निवेशकों ने लंबा संघर्ष छेड कर बैंक को पटरी पर लाने की भी जदोजहद शुरू की थी। इसी के परिणामस्वरूप बैंक को जहां एक ओर बंद होने से बचा लिया गया था। दूसरी ओर निवेशकों को बैंक घोटाले के संदर्भ में दर्ज आपराधिक मामले के फैसले का बेसब्री से इंतजार था।

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