Wednesday, 20 March 2013

जांच में सात कंपनियां पाई गईं फर्जी: डिप्टी कमिश्नर ने किया खुलासा

कोडरमा: जिले में संचालित चिटफंड एवं नॉन बैंकिंग कंपनियां अवैध रूप से संचालित थी और अधिक ब्याज का झांसा देकर जनता से ठगी कर रही थी। उक्त बातें जिले के उपायुक्त उमाशंकर सिंह ने सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए कही। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों के पास यहां व्यवसाय करने लिए सेबी अथवा आरबीआई से किसी तरह की अनुमति प्राप्त नहीं है।

जांच के बाद भारी गड़बड़ी सामने आने के बाद इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी प्रशासन कर रहा है। डीसी ने कहा कि पिछले एक सप्ताह में इन कंपनियों को दो बार सभी जरूरी कागजात प्रस्तुत करने का मौका दिया गया। लेकिन सात में कुछ को छोड़ अन्य कंपनियों ने जांच दल के समक्ष अपना पक्ष भी नहीं रखा। जिन कंपनियों ने कागजात उपलब्ध कराए उससे जांच दल संतुष्ट नहीं है। कंपनियों को सोमवार को अंतिम मौका दिया गया था। जांच दल में अपर समाहत्र्ता शिवेन्द्र सिन्हा, एसडीओ बिंदु माधव सिंह, डीटीओ शाहिद अख्तर, डीएलओ ज्ञान प्रकाश मिंज शामिल थे। वहीं कागजातों की जांच के लिए दूसरे जिले से विशेषज्ञों की टीम को भी बुलाया गया था। सनद हो कि गत माह जिला प्रशासन के अधिकारियों ने जिले के साथ चिटफंड कंपनियों के कार्यालय का सील कर दिया था।

इन कंपनियों पर होगी कार्रवाई

कोडरमा: जिला प्रशासन ने जांचोंपरांत सात कंपनियों के बिजनेस को नियम विरूद्ध पाया है। इसमें वारिस फाइनांस एण्ड इनवेस्टमेंट लिमिटेड, वेलफेयर विल्डिंग एण्ड रियलइस्टेट प्राईवेट लिमिटेड, गोल्ड माइंस ग्रुप ऑफ कंपनीज, इनौरमस इन्डस्ट्रीज लिमिटेड, एमकेजी एग्रीकल्चर इंडिया लिमिटेड, सेवा भूमि रियल इस्टेट, रोज वैली, एलकेमिस्ट शामिल है। डीसी ने कहा की जल्द ही इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कि जायेगी। वहीं इन कंपनियों के बैंक एकाउंट को भी फ्रीज करवा दिया गया है ताकि निवेशकों के राशि की निकासी नही हो सके।

लोगों की शिकायत के लिए बना कोषांग

कोडरमा: चिटफंड कंपनियों के से संबधित शिकायत के लिए एसडीओ कार्यालय में शिकायत कोषांग का गठन किया गया है। यह कोषांग 20 मार्च तक प्रभावी रहेगा। डीसी ने लोगों से इन कंपनियों व अन्य दूसरी ऐसी कंपनियों की शिकायतें करने की अपील भूक्तभोगीयों से की है। उन्होंने लोगों से ऐसी कंपनियों में निवेश करने से बचने की भी अपील की है।

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