नई दिल्ली। एनडीए शासनकाल में हुए अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटन में
कथित गड़बड़ियों के मामले में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने भारती सेल्युलर के
चेयरमैन-कम-एमडी सुनील भारती मित्तल को बतौर आरोपी समन जारी किया है।
मित्तल के अलावा एस्सार ग्रुप प्रमोटर रवि रुईया, मामले में आरोपी कंपनी हचिसन मैक्स टेलिकॉम लिमिटेड के तत्कालीन डायरेक्टर असीम घोष, पूर्व टेलिकॉम सेक्रेटरी श्यामल घोष सहित 7 लोगों को समन भेजा गया है। इस मामले में सीबीआई का कहना है कि अडिशनल स्पेक्ट्रम ऐलोकेशन का फैसला उस समय किया गया, जब भारती ग्रुप की एक कंपनी का आईपीओ आना था। इससे संबंधित कंपनी को फायदा हुआ। चार्जशीट में कहा गया है कि दूरसंचार विभाग ने कथित तौर पर गलत तरीके से स्पेक्ट्रम आवंटित किया, जिससे सरकारी खजाने को 846 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
चार्जशीट के अनुसार जांच से यह पता चला है कि भारतीय टेलि वेंचर्स लिमिटेड का आईपीओ लंबित होने के दौरान तत्कालीन दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिक मंत्री प्रमोद महाजन ने 31 जनवरी 2002 को 6.2 मेगाहर्त्ज से 10 मेगाहर्त्ज तक अडिशनल स्पेक्ट्रम आवंटित करने का फैसला किया। इस साजिश में आरोपी श्यामल घोष भी शामिल थे।
मित्तल के अलावा एस्सार ग्रुप प्रमोटर रवि रुईया, मामले में आरोपी कंपनी हचिसन मैक्स टेलिकॉम लिमिटेड के तत्कालीन डायरेक्टर असीम घोष, पूर्व टेलिकॉम सेक्रेटरी श्यामल घोष सहित 7 लोगों को समन भेजा गया है। इस मामले में सीबीआई का कहना है कि अडिशनल स्पेक्ट्रम ऐलोकेशन का फैसला उस समय किया गया, जब भारती ग्रुप की एक कंपनी का आईपीओ आना था। इससे संबंधित कंपनी को फायदा हुआ। चार्जशीट में कहा गया है कि दूरसंचार विभाग ने कथित तौर पर गलत तरीके से स्पेक्ट्रम आवंटित किया, जिससे सरकारी खजाने को 846 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
चार्जशीट के अनुसार जांच से यह पता चला है कि भारतीय टेलि वेंचर्स लिमिटेड का आईपीओ लंबित होने के दौरान तत्कालीन दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिक मंत्री प्रमोद महाजन ने 31 जनवरी 2002 को 6.2 मेगाहर्त्ज से 10 मेगाहर्त्ज तक अडिशनल स्पेक्ट्रम आवंटित करने का फैसला किया। इस साजिश में आरोपी श्यामल घोष भी शामिल थे।
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